रविवार, 7 मई 2017

बात की बात – शादी में ...दारु

बात  की बात शादी में ...दारु
यारों शादी अगर दारू का दौर न चले तो सारा मजा किरकिरा हो जाता | दोस्त लोग होने वाले दुल्हे से कहते हैं अबे कित्ती की मंगा रहा है भाई अपन तो फलां ब्रांड  की पियेंगे तो जाएंगे बारात में नहीं तो तू जा |दुल्हे को भी पता होता है शादी में किसिम किसिम के डांस वही कर सकता जिसके बदन पर दारू देवी सवार होती है |वरना बिना पिए दोस्त बारात में ऐसे चलते मानो मैयत में जा रहे हों |उतरेहुए चेहरे ,होठों से मुस्कान भी ऐसे गायब जैसे होठों पे कीड़े ने काट लिया हो |इसलिए पीना -पिलाना पड़ता है | उधर लड़की वाले कहते दारूखोरों को बारात में मत लाना | तो फिर दुल्हे का बाप किसे ले जाए ,शवयात्रा के अनुभवशील पदयात्रियों को और किस्से डांस करवाए |
दोस्तों शादी के अवसर पर डांस का राज दारू  ही में छिपा है |बिना पिए आदमी से ज़रा डांस कराकर देखो | ऐसे डांस करता है जैसे घोड़ी उछल रही है | किसी पेड़ की शाखा हवा में हिल रही है |
इसलिए भैया दुल्हे के दोस्त पीकर  तो जाएंगे ही | दुल्हे का बाप  न भी बुलाये  तो भी वे बस में लटक आ जाएंगे | लड़की का बाप हाथ उठाकर कह भी दे भैया तुम्हारे बाराती पिटे तो अपन नहीं जानते काहे की वे पियेंगे तो डांस को लेकर लड़ेंगें |दरअसल स्थानीय नशे में द्युत दारूखोर भी डांस करने मूड में बारात के बीच में  घुस आते है और वे भी डांस करने लगते | इसी बीच धक्का-मुक्की ,हाथापाई शुरू होती है |इधर पीटने वाले पीटते रहते हैं | पिटने वाले पिटते रहते है |वैसे जब तक बाराती या घराती शादी में नहीं पिटते , शादी यादगार नहीं रह जाती |पीटने या पिटने के बाद दोस्तों के बीच कई दिनों तक फलां की बारात चर्चा का विषय बनी रहती हैं |
वैसे बरात में पीने वाले बड़े अजीब जीव होते हैं | कुछ चोरी –छिपे पीने वाले ऐसे ही अवसर ढूँढते हैं |और जब पीते हैं तो ऐसा पीते हैं कि उन्हें ढूँढना पड़ता है की भाईसाब नाली में पड़े है कि सड़क किनारे ऊगे बेशरम की झाड़ियों के बीच | दूसरे किस्म के वे होते हैं जो पीते हुए अपने गुट के साथ किस गाने पर कौन सा डांस करना है का मूड बनाते हैं |तीसरी किस्म उन लोगो की होती है जो पीते तो है मगर थोडा कम मगर सामने वाले को उनके पीने का अहसास न हो इसलिए रात में भी आँखों में रंगीन चश्मा चढ़ाकर रखते हैं |या तो बात पर मुस्कराते हैं या फिर दुनिया का गम अपने ऊपर लादे नजर आते हैं |
 भाईसाब देखा जाए तो अवसर के हिसाब से शराब बुरी चीज नहीं है |आजकल बिना शराब के रातें,बातें,व शरारते रंगीन होती हैं क्या |
                  सुनील कुमार ‘’सजल’’